:
Breaking News

नीट छात्रा मौत मामला: पप्पू यादव के आरोपों से गरमाई सियासत, पुलिस जांच पर गंभीर सवाल

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की रहस्यमयी मौत को लेकर बिहार की राजनीति और अधिक गर्मा गई है। शनिवार को पूर्णिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद पप्पू यादव ने नीतीश सरकार और पुलिस तंत्र पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस पूरे मामले ने मुख्यमंत्री के ‘सुशासन’ के दावे को गहरा आघात पहुंचाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत से ही जांच को भटकाने और सच्चाई को ढकने की कोशिश की गई, जिससे असली गुनहगार अब तक कानून की पकड़ से बाहर हैं।
पप्पू यादव ने कहा कि 11 जनवरी 2026 को पटना में हुई नीट छात्रा की मौत कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह दुष्कर्म और हत्या का गंभीर मामला है। छात्रा एक निजी अस्पताल में भर्ती थी, जहां उसकी मौत हुई। शुरुआती जांच एसआईटी के जिम्मे थी, लेकिन जांच की दिशा और रफ्तार पर लगातार सवाल उठते रहे। अब राज्य सरकार द्वारा मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश किए जाने के बीच पप्पू यादव ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल खड़े किए।
प्रेस वार्ता में उन्होंने दावा किया कि बिहार की जांच एजेंसियां इस मामले में पूरी तरह विफल रही हैं। पप्पू यादव के अनुसार, शुरुआत से ही लीपापोती का प्रयास किया गया और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिशें होती रहीं। उन्होंने कहा कि जब तक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं होगी, तब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल सकता।
सांसद ने विपक्ष के अन्य नेताओं से भी भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि सबसे पहले पीड़ित परिवार की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा पीड़ित परिवार से मिलने गए हैं और उनसे उनकी फोन पर भी बातचीत हुई है। पप्पू यादव ने आग्रह किया कि सत्ता में बैठे लोग केवल बयानबाजी तक सीमित न रहें, बल्कि परिवार को हर स्तर पर संरक्षण दें।
पप्पू यादव ने जांच के दायरे को व्यापक करने की मांग करते हुए कुछ गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल की संचालिका नीलम अग्रवाल और हॉस्टल भवन के मालिक मनीष रंजन की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार, यह भी सामने आना चाहिए कि ये लोग किन नेताओं और अधिकारियों से जुड़े हैं, उन्हें किसे-किसे पैसे भेजे गए और कथित तौर पर किस नेटवर्क के जरिए गतिविधियां संचालित की जाती थीं। उन्होंने इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की मांग की।
उधर, इस पूरे मामले में पुलिस को अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है। परिजनों का आरोप है कि जांच जानबूझकर कमजोर रखी गई और अहम सुरागों को नजरअंदाज किया गया। इसी पृष्ठभूमि में सीबीआई जांच की सिफारिश को लेकर बहस और तेज हो गई है।
नीट छात्रा की मौत अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की कानून-व्यवस्था, पुलिस की कार्यशैली और राजनीतिक इच्छाशक्ति की परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में सीबीआई जांच की दिशा और उससे निकलने वाले निष्कर्ष यह तय करेंगे कि इस मामले में सच्चाई सामने आती है या फिर यह भी अन्य लंबित मामलों की तरह फाइलों में सिमट कर रह जाता है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *